आधार से जुड़ी ये 5 गलतियां पड़ सकती हैं भारी! ₹1 लाख जुर्माना या सीधा जेल

क्या आपने कभी किसी को आधार नंबर व्हाट्सएप या ईमेल पर भेजा है? या साइबर कैफे से e-Aadhaar डाउनलोड किया है? तो संभल जाइए! UIDAI की नजर अब सख्त है—इन 5 गलतियों से बचना जरूरी नहीं, अनिवार्य है… वरना भुगतनी पड़ सकती है भारी सज़ा।

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By Nishant
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आज के डिजिटल युग में आधार कार्ड-Aadhaar आपकी पहचान से कहीं अधिक बन चुका है—यह बैंकिंग, सब्सिडी, टैक्स रिटर्न, और मोबाइल वेरिफिकेशन जैसी जरूरी सेवाओं का प्रवेश द्वार है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इससे जुड़ी कुछ आम गलतियां आपकी परेशानी का कारण बन सकती हैं? UIDAI के नियमों के अनुसार, यदि आपने इन निर्देशों का पालन नहीं किया, तो आपको ₹1 लाख तक जुर्माना या जेल हो सकती है।

आधार की जानकारी साझा करना पड़ सकता है भारी

अगर आपने किसी प्राइवेट कंपनी, दुकान या व्यक्ति को बिना उचित अधिकार के आधार डिटेल्स दे दिए, तो यह IT Act और Aadhaar Act दोनों के तहत अपराध माना जा सकता है। UIDAI का साफ निर्देश है कि आधार नंबर केवल उन संस्थाओं को दिया जाए जो इसकी उपयोग की विधिक अनुमति रखती हैं।

सोशल मीडिया पर आधार साझा न करें

कई लोग अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर आधार कार्ड की फोटो शेयर कर देते हैं। ये आदत बेकसूर होते हुए भी आपको साइबर क्राइम का शिकार बना सकती है। पहचान की चोरी (Identity Theft) जैसे अपराधों में इसका बेजा इस्तेमाल हो सकता है, जिससे आपकी वित्तीय और सामाजिक छवि दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

सार्वजनिक कंप्यूटर या साइबर कैफे से ई-आधार डाउनलोड से बचे

अगर आप किसी साइबर कैफे या ऑफिस कंप्यूटर से अपना e-Aadhaar डाउनलोड करते हैं और उसे डिलीट करना भूल जाते हैं, तो आपकी व्यक्तिगत जानकारी किसी गलत हाथ में जा सकती है। इससे न सिर्फ आपकी पहचान चोरी हो सकती है बल्कि आपके नाम पर फर्जी लेनदेन भी संभव है।

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बायोमेट्रिक डेटा को लॉक करना जरुरी

आधार कार्ड में आपके फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन जैसे बायोमेट्रिक्स स्टोर होते हैं। अगर आपने इन्हें UIDAI की वेबसाइट से लॉक नहीं किया है, तो कोई भी धोखाधड़ी से इनका उपयोग कर सकता है। बायोमेट्रिक लॉकिंग एक आसान लेकिन बेहद जरूरी उपाय है जिसे नज़रअंदाज़ करना महंगा साबित हो सकता है।

ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री की निगरानी न करना बड़ी चूक

UIDAI आपको यह सुविधा देता है कि आप जान सकें आपके आधार का कहां-कहां इस्तेमाल हुआ है। इसे ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री कहते हैं। अगर आप इसे नियमित रूप से नहीं चेक करते, तो आपको यह पता भी नहीं चलेगा कि आपके आधार नंबर का कोई और उपयोग कर रहा है। समय पर निगरानी से आप कई अनहोनी से बच सकते हैं।

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