
वोटर आईडी (Voter ID) को आधार (Aadhaar) से लिंक करने की प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। चुनाव आयोग (Election Commission) ने इस दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दिया है, जिससे मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित की जा सके। हालांकि, यह प्रक्रिया अनिवार्य होगी या नहीं, इस पर अभी भी बहस जारी है। 2015 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आधार को अनिवार्य रूप से जोड़ने पर रोक लगा दी थी, लेकिन अब सरकार और चुनाव आयोग इसे दोबारा लागू करने की योजना बना रहे हैं।
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सरकार की रणनीति और तैयारी
18 मार्च 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें केंद्रीय गृह सचिव, विधायी विभाग के सचिव, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव और UIDAI के सीईओ ने भाग लिया। इस बैठक में वोटर आईडी को आधार से लिंक करने की प्रक्रिया की समीक्षा की गई और इसे लागू करने की रणनीति पर चर्चा हुई। सरकार का उद्देश्य है कि यह लिंकिंग प्रक्रिया पारदर्शी हो और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सुधार किया जा सके।
2015 में क्यों लगी थी रोक?
2015 में जब चुनाव आयोग ने पहली बार वोटर आईडी को आधार से जोड़ने की पहल की थी, तब आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में करीब 55 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटने की खबर आई थी। इससे मतदाताओं के अधिकारों पर सवाल खड़े हुए थे और सुप्रीम कोर्ट ने आधार लिंकिंग पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि आधार केवल पहचान का प्रमाण है, मतदान का अधिकार देने या छीनने का आधार नहीं हो सकता।
क्या नया बदलाव होने जा रहा है?
अब सरकार और चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से स्वैच्छिक (Voluntary) हो। कोई भी मतदाता अगर आधार नहीं देना चाहता, तो उसे इसका उचित कारण बताना होगा। सरकार फॉर्म 6B में संशोधन करने की योजना बना रही है, जिससे यह स्पष्ट किया जा सके कि आधार लिंकिंग आवश्यक नहीं है। लेकिन जो लोग अपने आधार को वोटर आईडी से जोड़ते हैं, उनकी जानकारी को अधिक सुरक्षित और प्रमाणित बनाया जाएगा।
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वोटर आईडी-आधार लिंकिंग से क्या होंगे फायदे?
इस प्रक्रिया से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि फर्जी मतदान (Fake Voting) पर रोक लगाई जा सकेगी। एक ही व्यक्ति के नाम से दो बार रजिस्ट्रेशन करने की संभावना खत्म हो जाएगी। साथ ही, मतदाता सूची में से डुप्लीकेट नाम हटाकर इसे अधिक सटीक और पारदर्शी बनाया जा सकेगा। चुनावी प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने में भी यह कदम मददगार साबित होगा।
क्या यह प्रक्रिया सभी के लिए अनिवार्य होगी?
नहीं, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि वोटर आईडी को आधार से लिंक करना पूरी तरह से स्वैच्छिक होगा। कोई भी मतदाता अगर अपने आधार की जानकारी नहीं देना चाहता है, तो उसका नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। हालांकि, सरकार मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए यह प्रक्रिया अपनाने की सिफारिश कर रही है।
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