
डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में आधार कार्ड के माध्यम से डिजिटल सिग्नेचर की सुविधा ने दस्तावेजों की प्रक्रिया को बेहद सरल, सुरक्षित और तेज़ बना दिया है। अब किसी भी कागज़ी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने के लिए भौतिक उपस्थिति या स्कैनिंग की आवश्यकता नहीं रह गई है। केवल आधार नंबर और ओटीपी के माध्यम से आप किसी भी इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ पर कानूनी रूप से मान्य हस्ताक्षर कर सकते हैं।
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क्या है आधार ई-साइन और कैसे करता है काम
आधार ई-साइन एक इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर सेवा है जो UIDAI के माध्यम से प्रमाणित होती है। यह सेवा किसी भी भारतीय नागरिक को उसके आधार नंबर की सहायता से डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा देती है। इसके लिए उपयोगकर्ता को अपने दस्तावेज़ को उस डिजिटल सिग्नेचर प्लेटफ़ॉर्म पर अपलोड करना होता है, जो ई-साइन की सुविधा प्रदान करता है। जैसे ही आधार नंबर डाला जाता है, एक OTP (One Time Password) पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है। ओटीपी के सत्यापन के बाद दस्तावेज़ पर ई-साइन स्वतः जनरेट हो जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया में कोई हार्डवेयर टोकन, USB डिवाइस या फिजिकल उपस्थिति की जरूरत नहीं होती, जिससे यह प्रक्रिया अत्यंत सहज और डिजिटल रूप से सुरक्षित बन जाती है।
डिजिटल सिग्नेचर के फायदे
आधार आधारित डिजिटल सिग्नेचर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कानूनी रूप से मान्य (Legally Valid) है और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के तहत पूरी तरह प्रमाणित है। इससे सरकारी और निजी संस्थानों दोनों में इसका उपयोग सुगमता से किया जा सकता है।
दूसरा बड़ा फायदा है सुरक्षा (Security)। दस्तावेज़ों को डिजिटल तरीके से हस्ताक्षरित करने पर छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो जाती है, क्योंकि डिजिटल सिग्नेचर में एक यूनिक हैश और एन्क्रिप्शन तकनीक शामिल होती है।
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इसके अलावा, यह एक पेपरलेस (Paperless) प्रक्रिया है, जिससे पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ती है और संस्थानों की संचालन लागत भी घटती है।
किफ़ायती, तेज़ और उपयोगकर्ता के लिए आसान
जहां पहले दस्तावेज़ों को साइन करने के लिए प्रिंट, स्कैन और मेल जैसे कई स्टेप्स होते थे, वहीं अब सिर्फ कुछ क्लिक से यह कार्य पूरा हो सकता है। यह प्रक्रिया समय की बचत (Time-Saving) के साथ-साथ लो-कॉस्ट ऑपरेशन को भी बढ़ावा देती है।
बड़ी कंपनियों, बैंकों, बीमा एजेंसियों, रिन्यूएबल एनर्जी-Renewable Energy प्रोजेक्ट्स, और IPO जैसे मामलों में अब यह सिग्नेचर प्रक्रिया काफी हद तक डिजिटल सिग्नेचर से संचालित होती है।
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