
हाल ही में चुनाव आयोग (Election Commission) और गृह मंत्रालय (Home Ministry) की एक अहम बैठक में वोटर आईडी को आधार कार्ड से जोड़ने को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। इस बैठक में यह बात सामने आई कि अब वोटर लिस्ट (Voter List) की शुद्धता बनाए रखने के लिए जिन मतदाताओं ने अभी तक आधार लिंक नहीं किया है, उन्हें इसका कारण बताना पड़ सकता है।
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बिना आधार लिंक भी वोट देने का रहेगा अधिकार, लेकिन…
यद्यपि सरकार ने आधार लिंकिंग को अब तक अनिवार्य नहीं किया है, फिर भी यदि कोई मतदाता अपना आधार नंबर (Aadhaar Number) नहीं देना चाहता, तो उसे निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (Electoral Registration Officer – ERO) के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना कारण बताना होगा। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि फर्जी और दोहराव वाले वोटर रजिस्ट्रेशन को हटाया जा सके।
वोटर आईडी-आधार लिंकिंग अब क्यों बनी जरूरी?
इस पूरे प्रयास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची सटीक और पारदर्शी हो। कई बार एक ही व्यक्ति के नाम अलग-अलग राज्यों में या एक ही राज्य में कई बार दर्ज पाए जाते हैं, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लगता है। आधार-वोटर आईडी लिंकिंग (Aadhaar-Voter ID Linking) से यह दोहराव रोका जा सकेगा।
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क्या आधार न देने से मतदाता सूची से नाम हट जाएगा?
इस पर चुनाव आयोग का स्पष्ट कहना है कि आधार नंबर देना पूरी तरह से स्वैच्छिक है। यदि कोई नागरिक अपने व्यक्तिगत कारणों से आधार नंबर नहीं देना चाहता, तो उसे मतदाता सूची से हटाया नहीं जाएगा। लेकिन उसे इसके लिए उचित कारण बताना होगा। इससे स्पष्ट होता है कि बिना आधार के भी वोट डालने का अधिकार सुरक्षित रहेगा, मगर प्रक्रिया थोड़ी जटिल हो सकती है।
आधार लिंकिंग के पीछे सरकार का उद्देश्य
सरकार का यह मानना है कि इस पहल से डुप्लीकेट वोटर्स (Duplicate Voters) को हटाने और मतदाता सूची (Electoral Roll) को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने में मदद मिलेगी। आधार-आधारित प्रमाणीकरण (Aadhaar-based authentication) से यह पता चल पाएगा कि एक व्यक्ति केवल एक ही जगह से वोट डाल रहा है या नहीं।
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