आज के समय में सभी के लिए आधार कार्ड एक अनिवार्य दस्तावेज बन चुका है। बैंक अकाउंट खोलने से लेकर आईडी जमा करने में आधार ही उपयोगी रहता है। किंतु ये भी सवाल उठता है कि किसी व्यक्ति के मर जाने पर उसका आधार कार्ड परिवार और समाज की जिम्मेदारी बन जाता है।

अधिकतर मौकों पर किसी व्यक्ति के मरने पर उससे संबंधित कई डॉक्यूमेंट पर परिवार वाले कोई कार्यवाही नहीं करते है। इसे लोगो को यह जरूर जानना चाहिए कि उस मृतक की डिजिटल आईडी पर क्या कार्यवाही करके उसको सुरक्षित किया जाए। उचित कार्यवाही न करने पर परिवार के लिए भी परेशानी पैदा हो सकती है।
मृतक के आधार डिएक्टिवेशन क्यों जरूरी
अगर किसी व्यक्ति के मर जाने पर भी उसका आधार कार्ड एक्टिव रहता है तो कोई जालसाज इस आधार का यूज गलत उद्देश्य से कर सकता है। वो व्यक्ति इन कामों में यूज करेगा –
- किसी सरकारी स्कीम का फायदा लेने में
- पेंशन योजना या सब्सिडी पाने में
- नकली पहचान से फ्रॉड करने में।
इन सभी बातों से बचाव के लिए किसी मृतक के आधार कार्ड को “डिएक्टिव” करना बेहद जरूरी है ताकि उसकी आईडी का दुरुपयोग न होने पाए। याद रखे UIDAI मृतक का आधार अपने आप बंद नहीं करता है।
मृतक के आधार का क्या करें
- मृतक की सुरक्षा के लिए UIDAI के पोर्टल या mAdhaar ऐप के द्वारा बायोमेट्रिक लॉक करने से उसकी फिंगरप्रिंट का यूज नहीं हो सकेगा।
- असली आधार कार्ड को मिटाने के स्थान पर इसको डेथ सर्टिफिकेट के साथ अपने पास सम्हाले। यह किसी कानूनी या प्रोपर्टी के काम में मददगार होगा।
- परिजन आधार कार्ड को यूज करके बैंकिंग, बीमे, शेयर्स और अन्य फाइनेंशियल सर्विस पर डेथ सर्टिफिएट के साथ उचित कार्यवाही करें।
- अभी UIDAI ने मृतक का आधार स्थाई तौर पर डिलीट करने का ऑप्शन नहीं दिया है।
मृतक के आधार की रिपोर्ट करना
- सबसे पहले myAdhaar की ऑफिशियल वेबसाइट को ओपन करें।
- होम पेज में “Report Death of a Family Member” ऑप्शन को चुने।

- अब मृतक के जरूरी डिटेल्स दर्ज करें।

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क्या मृतक का आधार सरेंडर करें?
इस समय UIDAI ने किसी मरे व्यक्ति के आधार को ऑफिशियल सरेंडर करने या स्थाई तौर पीआर डिलीट करने का विकल्प नहीं दे रहा है। साथ ही UIDAI किसी के आधार को फिजिकली वापस लेने के प्रावधान भी नही देता है।




