भारत सरकार ने डिजिटल इंडिया अभियान के तहत देशभर में आधार कार्ड को अनिवार्य किया है। फैसले का उद्देश्य वित्तीय जालसाजी की रोकथाम और सरकारी लाभ की DBT (ट्रांसफर) सही से करना है। लेकिन अगर किसी नागरिक के पास अपना आधार कार्ड भी न हो तो सरकार की तरफ से “अपवाद प्रबंधन” का सिस्टम भी है।

भारत सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक, किसी नागरिक के पास इसका आधार न होने की वजह से उसको सरकारी लाभ से वंचित नहीं कर सकते है। अगर किसी व्यक्ति के पास आधार कार्ड नहीं है तो उसके लिए दूसरे ऑप्शन भी निर्धारित किए गए है।
यहां जरूरी है आधार कार्ड
इस समय पर केंद्र सरकार की करीब 300 से ज्यादा कल्याणकारी स्कीम में लोगो को DBT का फायदा मिल रहा है। सभी स्कीम इन पारदर्शिता रखते हुए बिचौलियों से मुक्ति दिलाने को आधार सेवा जरूरी की गई है। आधार अधिनियम धारा 7 के अंतर्गत सरकार कुछ स्कीम में आधार मांग सकती है। अनिवार्य आधार वाली कुछ स्कीम के नाम यह है-
- PDS के अंतर्गत सरकारी राशन पाने में।
- पीएम किसान योजना की राशि और LPG गैस सब्सिडी।
- विधवा पेंशन, बुढ़ापा पेंशन एवं दूसरी कल्याणकारी पेंशन स्कीम।
- मनरेगा स्कीम में मजदूरी की पेमेंट लेने में।
- आयुष्मान भारत, स्कूल एडमिशन, मिडडे मील और स्कॉलरशिप आदि में।
आधार न होने पर कानूनी अधिकार
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, किसी नागरिक के पास आधार न होने पर उसे संवैधानिक अधिकार एवं सरकारी स्कीम से वंचित नहीं कर सकते है। हालांकि सरकार आधार अधिनियम की धारा 7 के अंतर्गत कल्याणकारी योजना में आधार मांग सकेगी। किंतु यहां पर आधार न होने पर अन्य आईडी द्वारा लाभ देना जरूरी होगा।
सरकार ने भी आधार प्रबंधन के द्वारा किसी भी नागरिक को आधार न होने पर स्कीम से बाहर न करने की गाइडलाइन दी है। विभाग को एनरोलमेंट का प्रोत्साहन देते हुए किसी दूसरी वैलिड सरकारी दस्तावेज (जैसे मतदाता आईडी, राशन कार्ड या पासपोर्ट आदि) से लाभ देना है। ऐसे एक नागरिक को आधार न होने पर सरकारी लाभ लेने का कानूनन अधिकार है।
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कानूनी फैसले का प्रभाव
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय और सरकार की गाइडलाइन से आधार पर चिंतित नागरिकों को राहत मिलेगी। साथ सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग कम होगा और सभी तक लाभ पहुंचाने में पारदर्शिता आएगी। सभी वर्ग और आयु के लोग अपनी पहचान स्थापित करके लाभार्थी बन सकेंगे।


